जो लोग मनचाहे शहर या स्थान पर ट्रांसफर कराना चाहते हैंतो उन्हें प्रतिदिन सुबह-सुबह यह उपाय करना चाहिए। उपाय के अनुसार व्यक्ति सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सभी नियमित कार्यों से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद एक तांबे के लौटे में साफ जल भरें। जल में लाल मिर्ची के दानें डालें और यह जल सूर्य देव को अर्पित करें। जल चढ़ाते समय जिस स्थान पर ट्रांसफर कराना है उस स्थान का ध्यान करें। जल्दी ही आपकी इच्छा पूर्ण हो जाएगी। सभी सुख-सुविधाओं की इच्छा रखने वाले लोगों को प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर अक्षत यानी चावल अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस उपाय से व्यक्ति को अखंड लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। इस उपाय के साथ ही व्यक्ति को अपने कर्म पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ करना चाहिए। किसी भी प्रकार की बेईमानी नुकसानदायक हो सकती है। Dharm desk se sabhar.
LORD VISHNU LAXMI
Friday, March 22, 2013
पर्स में रखें 21 पीले चावल के दाने, पैसों से भरा रहेगा पर्ससभी चाहते हैं कि उनका पर्स हमेशा पैसों से भरा रहे और फिजूल खर्च न हो। ज्यादा पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत के साथ अच्छी किस्मत भी महत्व रखती है। कुछ परिस्थितियों में मेहनत के बाद भी पर्याप्त धन प्राप्त नहीं हो पाता या खर्चों की अधिकता की वजह से बचत नहीं हो पाती। किसी भी शुभ मुहूर्त या होली के दिन या किसी भी पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठें। सभी नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
इसके बाद लाल रंग का कोई रेशमी कपड़ा लें। अब उस लाल कपड़े में पीले चावल के 21 दानें रखें। ध्यान रहें चावल के सभी 21 दानें पूरी तरह से अखंडित होना चाहिए यानि कोई टूटा हुआ दाना न रखें। उन दानों को कपड़े में बांध लें। लाल कपड़े में 21 पीले चावल के दाने बांधने के बाद धन की देवी माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजन करें।
पूजा में यह लाल कपड़े में बंधे चावल भी रखें। पूजन के बाद यह लाल कपड़े में बंधे चावल अपने पर्स में छिपाकर रख लें। ऐसा करने पर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधी मामलों में चल रही रुकावटें दूर हो जाती ऐसा करने पर धन संबंधी परेशानियां दूर होने लगेंगी। ध्यान रखें कि पर्स में किसी भी प्रकार की अधार्मिक वस्तु कतई न रखें।
इसके अलावा पर्स में चाबियां नहीं रखनी चाहिए। सिक्के और नोट अलग-अलग व्यस्थित ढंग से रखे होने चाहिए। नोट के साथ बिल या अन्य पेपर न रखें। किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु पर्स में न रखें। चावल को पीला करने के लिए हल्दी का प्रयोग करें। इसके लिए हल्दी में थोड़ा पानी डालें। अब गीली हल्दी में चावल के 21 दानें डालें।
शीघ्र विवाह हेतु:जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा रही है तो यह उपाय करें।
होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबूत पान, 1 साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय शुभ मुहूर्त में यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे।
कलियुग में हनुमानजी की पूजा सभी कष्टों को बहुत ही जल्द दूर करने वाली मानी गई है।जो भी भक्त बजरंग बली का ध्यान करता है उसकी सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए किसी भी मंगलवार या शनिवार के दिन या किसी भी विशेष शुभ मुहूर्त में या किसी भी विपत्ति के समय यहां बताया जा रहा उपाय किया जा सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और प्रात: काल के सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं, स्नान आदि के बाद पवित्र हो जाएं।इसके बाद किसी भी हनुमान मंदिर में जाएं और हनुमानजी के समक्ष धूप-अगरबत्ती, दीपक जलाएं, पुष्प-हार, प्रसाद आदि अर्पित करें
इसके बाद आसन बिछाकर बैठ जाएं और हनुमान चालीसा के 108 पाठ करें।ध्यान रहें हनुमान चालीसा के 108 पाठ लगातार, बिना रुके किए जाने चाहिए। इस साधना में समय अधिक लगता है। अत: इस बात का विशेष ध्यान रखें।
यह पूजा शांति पूर्ण ढंग से की जानी चाहिए। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।हनुमान चालीसा के पाठ की संख्या ध्यान रखने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपायोग किया जा सकता है। आप यह पूजा घर पर भी कर सकते हैं।
किसी एकांत स्थान पर यह पूजा की जानी चाहिए। इसके लिए साफ-स्वच्छ स्थान का चयन करें।जो भी भक्त ऐसा नियमित रूप से करता है वह सभी प्रकार के कष्टों और दुखों से मुक्त हो जाता है।
जो भी भक्त नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसे रामदूत की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही जानिए एक ऐसा उपाय जो बहुत ही जल्द आपके दुख, रोग, पैसों की तंगी को दूर कर सकता है।
Sunday, July 1, 2012
स्त्री स्वयं एक कला है
स्त्री है तो दुनिया में श्रंगार बचा है ,प्रेम का भाव बचा है ,घृणा सर नहीं उठा पाती ,फिर भी अफ़सोस ...............
भ्रूण -हत्याएं बढती जा रही हैं ।सवाल बस इतना है कि हम जीवन जीना चाहते हैं ? कैसी कुदरत चाहते हैं
जो स्त्री के बिना सोची जा रही है ,मागी जा रही है , हमारे द्वारा इच्छित है ? .............अमिताभ
भ्रूण -हत्याएं बढती जा रही हैं ।सवाल बस इतना है कि हम जीवन जीना चाहते हैं ? कैसी कुदरत चाहते हैं
जो स्त्री के बिना सोची जा रही है ,मागी जा रही है , हमारे द्वारा इच्छित है ? .............अमिताभ
Tuesday, May 15, 2012
गति है तो समय है
समय प्रकृति में अपनी नेसर्गिक अवस्था में व्याप्त है और अनवरत रूप से
गतिशील भी है|इसे देखा नहीं जा सजाता,पर इसकी गणितीय व्याख्या
की जा सकती है|वैज्ञानिक समीकरणों की माने तो एक गति में चलने से
समय के पार भी जाया जा सकता है|रोजमर्रा की जिन्दगी में समय का
महत्व इतना अधिक है कि जिन्दगी को खुशियों,उपलब्धियों व् संवेदनाओ
के जरिये नहीं आँका जाता,बल्कि हम समय के फीते से इसे नापने लगते
हैं इससे जुडी कई बातों को समय के लिहाज से ही परखते समझते
है| .................देवाशीष प्रसून
Monday, May 14, 2012
भक्त के सच्चे ह्रदय की पुकार भगवन अवश्य सुनते हैं |
अच्छी स्थिति में भी भगवान् पर भरोसा नहीं होता तब साधन की शिथिलता में तो हो ही कहाँ से,परन्तु अब ज्यादा निराशा नहीं होती|
सो भगवान् पर भरोसा तो अच्छी-बुरी सभी स्थितियों में रखना चाहिए
इसके सिवा और सहारा ही क्या है?बलवान और निर्बल --सभी के बल
एक भगवान् ही हैं , परन्तु अपने को वास्तव में निर्बल मानकर भगवान्
के बल पर भरोसा रखने वाले का बल तो भगवान् हैं , इस भगवान् के बल
को पाकर वह अति निर्बल भी महान बलवान हो सकता है |
Sunday, May 13, 2012
साथी बोलो है क्या साहस ..........
कुछ लोग बहुत ज्यादा डरते है और इसके चलते हिम्मत छोड़ देते हैं और कूदने से पहले पसीना- पसीना हो जाते हैं, उनके हाथ पैर सुन्न होने लगते हैं और चूँकि वे अभी विमान के बोर्ड पर ही होते है, लिहाज़ा कूदने से मन कर देते हैं|दूसरी तरह के लोग निर्भीक होते हैं,कोई डर नहीं दिखाते,न पसीने से तरबतर होते हैं, न उनकी आवाज़ कपकपाती है| बहुत शांति के साथ हवा में छलांग लगा देते हैं,उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं होती|तीसरी तरह के लोग कूदने से पहले डरे जरुर होते है ,लेकिन जब हवा में कूदने का समय आता है तो झिझकते नहीं.........जय कुमारEdit
जीवन की राह प्रभु की ओर|
बड़े शहरों को जोड़ने वाले हायवे में दो सड़कें होती है -एक आने की और दूसरी जाने की| बीच में हर १५-२० कि मी पर हायवे कि सोनो सड़कों के बीच एक कट आता है जहा से आप अपने वाहन को मोड़कर दिशा बदल सकते है ऐसे ही मानव जीवन में दो दिशाए है एक माया कि और दूसरी प्रभु की| माया की दिशा पर चलते हुए इसका अंत बहुत भयावह है लेकिन प्रभु मार्ग की दिशा पर चलते हुए मनुष्य प्रभु का ही होजाता है ---- कल्याण से साभार
अहंकार मन को कमजोर बनाता है|
जीवन एक शब्द नहीं है| यह एक वाक्य है| इसे आजीवन कारावास मत बना लीजिये| जीवन जीने का अर्थ है जुड़ना,सम्बंधित होना| प्रत्येक सम्बन्ध के तीन पहलू हैं, सम्बन्ध बनाने वाला, सम्बंधित, सम्बन्ध | जब कोई सम्बन्ध समाप्त होता है, तो जीवन भी समरस होता है,वर्ना इसके विपरीत होता है|समरस होने की कला हमें धर्म सिखाती है -- स्वामी सुखबोधानन्द जी महाराज
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