LORD VISHNU LAXMI

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Wednesday, July 30, 2014

फेंगशुई में क्यों माना गया है बैंबू को लकी पौधा, ये हैं इसकी बड़ी खासियत

 बांस एक बहुत उपयोगी हैं। इसका प्रयोग मकान, मकान की छतों, झोपडिय़ों व दीवारों के निर्माण में होता है। इससे चटाइयां और टोकरियां भी बनाई जाती हैं। जापान में इसको भीतर से साफ कर पानी की पाइप के रूप में भी प्रयोग करते हैं। विश्व के कई देशों में इसका सब्जी के रूप में भी प्रयोग होता है। इसकी शाखाएं दवाइयां बनाने के काम भी आती हैं। बांस के पौधे में एक साथ कई बांस समुह में उगते हैं। खैर बांस के इन गुणों से तो हम सभी परिचित हैं, लेकिन आजकल एक स्पेशल बैंबू प्लांट भी बाजार में उपलब्ध है। जिसे लकी बैंबू कहा जाता है। फेंगशुई में इसे पॉजीटिव एनर्जी का प्रतीक माना गया है।
 बैंबू प्लांट की विशेषता- बैंबू को फेंगशुई में लकी माना गया है। दरअसल, बांस का पौधा शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह परम ज्ञान का प्रतीक है। बांस का पौधा खोखला होता है। इसीलिए इसके माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह पूरे घर में होता है। यदि किसी के बगीचे में बांस का पौधा बहुत अच्छे से फल-फूल रहा हो वह बहुत लकी होता है।बैंबू को घर व ऑफिस में लगाया जाता है। इस पौधे को सूरज की सीधी रोशनी की जरूरत नहीं पड़ती है।
इसे ज्यादा रखरखाव और देखभाल की भी जरूरत नहीं होती। पूरे साल में यह पौधा तीन-चार इंच ही बढ़ता है। यह पौधा नॉन टॉक्सिक है और बच्चों व पालतू जानवरों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। फेंगशुई मान्यता है कि ड्रेसीना सेडेंरियाना नामक यह पौधा घर में लगाने से बेड लक दूर होता है। वास्तु के अनुसार यह पौधा धातु, अग्नि, जल, पृथ्वी, आकाश, वायु और जंगल के तत्वों में संतुलन पैदा करता है।क्यों लगाया जाता है बैंबू- फेंगशुई लकी बैंबू उस स्थान की एनर्जी में संतुलन पैदा करता है। यह पौधा उस जगह रहने और काम करने वाले लोगों को तनाव से दूर रखता है।इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। फेंगशुई पद्धति के अनुसार यह पौधा घर में रहने वालों के लिए मूड बूस्टर का काम भी करता है, क्योंकि इसकी सकारात्मक ऊर्जा वातावरण को जीवंत बनाए रखती है।इसके तनों को बंडल में बांधने के लिए रेड रिबन का उपयोग किया जाता है, जो अग्नि तत्व के सकारात्मक रूप का प्रतिनिधित्व करता है। बाजार में यह पौधा अलग-अलग आकार में मौजूद है। बैंबू के प्लांट की कीमत उसकी उम्र के हिसाब से होती है। यह पौधा जितना पुराना होता है। उसकी कीमत उतनी ही ज्यादा होती है।जरूरत के अनुसार लगाएं बैंबू-बैंबू का सही प्रभाव प्राप्त हो, इसके लिए आवश्यकता अनुसार बैंबू स्टिक  लगाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का लक चाहते हैं।दो बैंबू लगाने से लव लक बढ़ता है। वहीं तीन बैंबू स्टिक बुद्धि और खुशी में बढ़ोतरी करता है। आठ नंबर फेंगशुई में बहुत लकी माना जाता है। इसीलिए आठ स्टिक वाले बैंबू को वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नौ स्टिक वाले पौधे को गुड लक बढ़ाने वाला माना जाता है। दस स्टिक वाले पौधे को संपूर्णता और परफेक्शन का प्रतीक माना जाता है।
कहां रखें- घर या ऑफिस के पूर्वी भाग में ऑफिस डेस्क के पूर्वी हिस्से पर बैंबू प्लांट रखना शुभ माना जाता है। यदि आप धन में बढ़ोतरी चाहते हैं तो घर के वैल्थ एरिया यानी दक्षिण-पूर्वी कोने में बैंबू प्लांट लगाएं।

 


 

जानिए घर में फिश अक्वेरियम कहां रखें, ये हैं इसे रखने के फायदे

वास्तु से जुड़ी बहुत सी चीजें हैं, जो घर में सुख-शांति व उन्नति का प्रतीक बन चुकी हैं। इसलिए लोग आजकल घर में ऐसी कई चीजें रखते हैं जो वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी हैं। ये चीजें घर में सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखती हैं। फिश अक्वेरियम भी एक ऐसी ही वस्तु है। फेंगशुई की मानें तो मछलियों में ऐसी शक्तियां होती है, जो घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सुख समृद्धि लाती है।
कहां रखें अक्वेरियम - फेंगशुई के अनुसार अक्वेरियम को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व में रखना चाहिए। इसे शयनकक्ष या रसोईघर में नहीं रखना चाहिए। इन जगहों पर रखने से संपत्ति की हानि होती है। दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए इसे मुख्य द्वार के बाईं ओर रखें।
घर में अक्वेरियम रखने के लाभ- फेंगशुई के अनुसार अक्वेरियम में मछलियों की संख्या का बड़ा ही महत्व है। अक्वेरियम में कम से कम नौ मछलियां होनी चाहिए।आठ मछलियां लाल या सुनहरे रंग की होनी चाहिए, जबकि एक मछली काले रंग की। ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की संख्या नौ बताई गई है। यही कारण है कि फेंगशुई में नौ मछलियां अक्वेरियम में रखने की बात कही गई है।

- जब कभी कोई मछली मर जाए तो उसे अक्वेरियम से बाहर निकाल दें और उसकी जगह नई मछली लाकर रख दें। ध्यान रखें कि जिस रंग की मछली मरी हो उसी रंग की नई मछली लाएं।

- यह आपको संकट से बचाती है। यही कारण है कि वास्तु और फेंगशुई में अक्वेरियम यानी मछली घर रखने की सलाह दी गई है।

Saturday, April 19, 2014

                         ये हैं हनुमान चालीसा की पांच चौपाइयों के खास उपाय

भीम रूप धरि असुर संहारे।रामचंद्रजी के काज संवारे।।
जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं और कोई रास्ता दिखाई न दे तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का विशेष जप करें। यदि एकाग्रता और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा की सिर्फ इस पंक्ति का जप किया जाए तो शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
इस पंक्ति का अर्थ यह है कि श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में हनुमानजी ने भीम रूप यानी विशाल रूप धारण किया था। इसी भीम रूप में असुरों-राक्षसों का संहार किया। श्रीराम के काम पूर्ण करने में हनुमानजी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिससे श्रीराम के सभी काम संवर गए।
लाय संजीवन लखन जियाये।श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
इस पंक्ति का जप करने से भयंकर बीमारियों से भी मुक्ति मिल जाती है। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और दवाओं का भी असर नहीं हो रहा है तो उसे भक्ति के साथ पूरी हनुमान चालीसा या सिर्फ इस पंक्ति का विशेष जप करना चाहिए। दवाओं का असर होना शुरू हो जाएगा, बीमारी धीरे-धीरे ठीक होने लगेगी।
इस चौपाई का अर्थ यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया था। तब सभी की औषधियों से भी लक्ष्मण की चेतना लौट नहीं रही थी। तब हनुमानजी संजीवनी औषधि लेकर आए और लक्ष्मण के प्राण बचाए। हनुमानजी के इस चमत्कार से श्रीराम अतिप्रसन्न हुए।

ये हैं हनुमान चालीसा की पांच चौपाइयों के खास उपाय

कुछ खास चौपाइयां और उनके अर्थ। साथ ही जानिए किस चौपाई के जप से क्या होता है...
रामदूत अतुलित बलधामा।अंजनिपुत्र पवनसुत नामा।
यदि कोई व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है तो उसे शारीरिक कमजोरियों से मुक्ति मिलती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि हनुमानजी श्रीराम के दूत हैं और अतुलित बल के धाम हैं। यानी हनुमानजी परम शक्तिशाली हैं। इनकी माता का नाम अंजनी है, इसी वजह से इन्हें अंजनी पुत्र कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी को पवन देव का पुत्र माना गया है और इसी वजह से इन्हें पवनसुत भी कहते हैं।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।कुमति निवार सुमति के संगी।।
यदि कोई व्यक्ति हनुमान चालीसा की इस पंक्ति का जप करता है तो उसे सुबुद्धि प्राप्त होती है। इस पंक्ति का जप करने वाले लोगों के कुविचार नष्ट होते हैं और सुविचार बनने लगते हैं। बुराई से ध्यान हटता है और अच्छाई की ओर मन लगता है।इस पंक्ति का अर्थ यह है कि बजरंगबली महावीर हैं और हनुमानजी कुमति को निवारते हैं यानी कुमति को दूर करते हैं। बजरंग बली सुमति यानी अच्छे विचारों को बढ़ाते हैं।
बिद्यबान गुनी अति चातुर।
रामकाज करीबे को आतुर।।
यदि किसी व्यक्ति को विद्याधन चाहिए तो उसे इस पंक्ति का विशेष रूप से जप करना चाहिए। इस पंक्ति के जप से हमें विद्या और चतुराई प्राप्त होती है। इसके साथ ही हमारे हृदय में श्रीराम की भक्ति भी बढ़ती है।
इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी विद्यावान और गुणवान हैं। हनुमानजी बहुत चतुर भी हैं। वे सदैव ही श्रीराम सेवा करने के लिए तत्पर रहते हैं। जो भी व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है, उसे हनुमानजी से विद्या, गुण, चतुराई के साथ ही, श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है।
 

Friday, January 17, 2014


जो लोग हस्ताक्षर करते समय नाम का पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और पूरा उपनाम लिखते हैं वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ईश्वर में आस्था रखने वाले और धार्मिक कार्य करना इनका स्वभाव होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी सुखी होता है।
जिन लोगों के हस्ताक्षर एक जैसे लयबद्ध नहीं दिखाई देते हैं वे मानसिक रूप से अस्थिर होते होते हैं। इन्हें मानसिक कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
जिन लोगों के हस्ताक्षर सामान्य रूप से कटे हुए दिखाई देते हैं वे नकारात्मक विचारों वाले होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य में असफलता पहले नजर आती है।जिन लोगों के सिग्नेचर मध्यम आकार के अक्षर वाले, जैसी उनकी हैंड राइटिंग है, ठीक वैसे ही हस्ताक्षर हो तो व्यक्ति हर काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करता है। वह हर काम में संतुलन बनाए रखता है। ये लोग दूसरों के सामने बनावटी स्वभाव नहीं रखते हैं। जैसे ये वास्तव में होते हैं ठीक वैसा ही खुद को प्रदर्शित करते हैं।
जो लोग अपने हस्ताक्षर को नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हैं वे आशावादी होते हैं। निराशा का भाव उनके स्वभाव में नहीं होता है। ऐसे लोग भगवान में आस्थ रखने वाले भी होते हैं। इनका उद्देश्य जीवन में ऊपर की ओर बढऩा होता है। इस प्रकार हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हैं।
जिन लोगों के हस्ताक्षर ऊपर की नीचे की ओर जाते हैं वे नकारात्मक विचारों वाले हो सकते हैं। ऐस लोग किसी भी काम में असफलता की बात पहले सोचते हैं।

सिर्फ हस्ताक्षर देखिए और समझिए किसी भी स्त्री या पुरुष की गुप्त बातें

आप बहुत धन कमाते है और फिर भी बचत नहीं होती है तो अपने हस्ताक्षर के नीचे की ओर पूरी लाईन खीचें तथा उसके नीचे दो बिंदू बना दें, इन बिंदुओं को धन बढऩे के साथ-साथ बढ़ाते रहें। याद रखें अधिकतम छ: बिंदू लगाए जा सकते हैं।जो लोग हस्ताक्षर का पहला अक्षर बड़ा लिखते हैं वे विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग किसी भी कार्य को अपने ही अलग अंदाज से पूरा करते हैं। पहला अक्षर बड़ा बनाने के बाद अन्य अक्षर छोटे-छोटे और सुंदर दिखाई देते हों तो व्यक्ति धीरे-धीरे किसी खास मुकाम पर पहुंच जाता है। ऐसे लोगों को जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो जाती हैं।जो लोग बुरी तरह से, जल्दी-जल्दी और अस्पस्ट हस्ताक्षर करते हैं वे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे लोग सुखी जीवन नहीं जी पाते हैं। हालांकि ऐसे लोगों में कामयाब होने की चाहत बहुत अधिक होती है और इसके लिए वे श्रम भी करते हैं। ये लोग किसी को धोखा भी दे सकते हैं। इनका स्वभाव चतुर होता है इसी वजह से इन्हें कोई धोखा नहीं दे सकता।कुछ लोग अपने हस्ताक्षर को तोड़-मरोड़ कर या टुकड़े-टुकड़े में करते हैं, हस्ताक्षर के शब्द छोटे-छोटे और अस्पष्ट होते हैं जो कि आसानी से समझ नहीं आते हैं। ऐसे लोग सामान्यत: बहुत ही चालाक होते हैं। ये लोग अपने काम से जुड़े राज किसी के सामने जाहिर नहीं करते हैं। कभी-कभी ये लोग गलत रास्तों पर भी चल देते हैं और किसी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।जो लोग कलात्मक और आकर्षक हस्ताक्षर करते हैं वे रचनात्मक स्वभाव के होते हैं। उन्हें किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है। ऐसे लोग किसी न किसी कार्य में हुनरमंद होते हैं। इन लोगों के काम करने का तरीका अन्य लोगों से एकदम अलग होता है। ऐसे हस्ताक्षर वाले लोग पेंटर या कोई कलाकार भी हो सकते हैं।कुछ लोग हस्ताक्षर के नीचे दो लाइन खींचते हैं। जो ऐसे सिग्नेचर करते हैं उनमें असुरक्षा की भावना अधिक होती है। ऐसे लोग किसी भी कार्य में सफलता को लेकर संशय में रहते हैं। खर्च करने में इन्हें काफी बुरा महसूस होता है अर्थात ये लोग कंजूस भी हो सकते हैं।                                    आगे दुसरे पेज पर 
 
 

Monday, December 9, 2013

मंगलवार को करें हनुमानजी के इन 9 उपायों में से कोई 1, मालामाल हो जाएंगे

सुबह-सुबह पीपल के कुछ पत्ते तोड़ लें और उन पत्तों चंदन या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की एक माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।
किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।
हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।
हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें
हनुमानजी के सामने रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।
किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
श्रीरामचरिमानस की चौपाइयों का जप करें। ऐसा करने में बहुत ही जल्द हनुमानजी प्रसन्न हो जाएंगे और आपको मालामाल कर देंगे।श्रीराम रक्षा स्रोत का पाठ किसी हनुमान मंदिर में करेंगे तो बहुत ही जल्द चमत्कारी फल होने लगेंगे। या किसी भी हनुमान मंदिर में जाए और श्रीराम के मंत्रों का जप करें। 
 

Saturday, October 19, 2013

पीपल के ये उपाय पहले नहीं पढ़े होंगे आपने, इनसे फटाफट बदलती है किस्मतइस उपाय से धीरे-धीरे हो जाएंगे मालामाल

यदि कोई व्यक्ति किसी पीपल के वृक्ष के नीचे छोटा सा शिवलिंग स्थापित करता है तो उसकी जीवन में कभी भी कोई परेशानियां नहीं आएंगी। यदि कोई भयंकर परेशानियां चल रही होंगी वे भी दूर हो जाएंगी। पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करके उसकी नियमित पूजा भी करनी चाहिए। इस उपाय से गरीब व्यक्ति भी धीरे-धीरे मालामाल हो जाता है।
पीपल के नीचे करें हनुमानजी का उपाय
पीपल के 11 पत्ते तोड़ें और उन श्रीराम का नाम लिखें। राम नाम लिखने के लिए चंदन का उपयोग किया जा सकता है। यह का पीपल के नीचे बैठकर करेंगे तो जल्दी शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। राम नाम लिखने के बाद इन पत्तों की माला बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें।
कलयुग में हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। इनकी कृपा प्राप्त करने के लिए कई प्रकार उपाय बताए गए हैं। यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है।
साढ़ेसाती या ढय्या हो तो ये उपाय करें
शनि दोषों से मुक्ति के लिए तो पीपल के वृक्ष के उपाय रामबाण हैं। शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के बुरे प्रभावों को नष्ट करने के लिए प्रति शनिवार पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सात परिक्रमा करनी चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक भी लगाना चाहिए।
परिक्रमा से दूर होता है कालसर्प दोष
पीपल में प्रतिदिन जल अर्पित करने से कुंडली के कई अशुभ माने जाने ग्रह योगों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। इस पेड़ की मात्र परिक्रमा से ही कालसर्प जैसे ग्रह योग के बुरे प्रभावों से छुटकारा मिल जाता है। इसके अतिरिक्त शास्त्रों के अनुसार इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास भी माना गया है।
 

Sunday, July 28, 2013

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग(नासिक)-                                                                                      4
सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे। 
यद्दर्शनात् पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्रयम्बकमीशमीडे।10।
क्या फल मिलता हैं- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिङ्ग के इस मंत्र स्मरण के साथ दर्शन और उनको स्पर्श करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। व्यक्ति को मोक्षपद प्राप्त होता है । इनका पूजन करने वालों को लोक-परलोक में सदा आनन्द रहता है ।
श्री केदारनाथ ज्योर्तिलिंग(उत्तरांचल)- 
महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः। 
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै: केदारमीशं शिवमेकमीडे।11।
क्या फल मिलता हैं- केदारनाथ ज्योर्तिलिंग को कड़ा चढ़ाने की परंपरा है। इस मंत्र का स्मरण कर कड़ा चढ़ाने वाले व्यक्ति को दु:ख नहीं होता और मोक्ष की प्राप्ति होती है। केदारनाथ के दर्शन के बाद यहां का पानी पीने का भी महत्व है।
श्रीघृष्णेश्वर ज्योर्तिलिंग(एलोरा) 
इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्। 
वन्दे महोदारतरं स्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये ।12। 
ज्योतिर्मयद्वादशलिंगकानां शिवात्मनां प्रोक्तमिदं क्रमेण। 
स्तोत्रं पठित्वा मनुजोऽतिभक्त्या फलं तदालोक्य निजं भजेच्च॥
क्या फल मिलता हैं- 
घुश्मेश्वर के दर्शन व पूजन से व्यक्ति के सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और उसका जीवन सुखमय हो जाता है। साथ ही सारे पाप नष्टï होते हैं ।
 
 
रामेश्वरम् ज्योर्तिलिंग(तमिलनाडु)- सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यै:।      3
श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि।7।
क्या फल मिलता हैं- 
इस मंत्र के साथ ज्योतिर्लिङ्ग दर्शन, स्मरण व पूजा कर गंगाजल चढ़ाने वाले के सभी दु:ख दूर होते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि दूध, दही और नारियल के जल से ज्योतिर्लिङ्ग को स्नान कराने वाले व्यक्ति की कई पीढिय़ों का उद्धार होता है।
श्री नागेश्वर ज्योर्तिलिंग(दारुकावन,महाराष्ट्र) 
याम्ये सदंगे नगरेतिऽरम्ये विभूषितांगम् विविधैश्च भोगै:। 
सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये।8।
क्या फल मिलता हैं- इस मंत्र के साथ नागेश ज्योतिर्लिंङ्ग के दर्शन व पूजन से तीनों लोकों की कामनाएं पूरी होती हैं। इसका उल्लेख शिवपुराण में भी है। कि ऐसा करने से सभी दु:ख दूर होते हैं और उसे सुख-समृद्धि मिलती है। केवल दर्शन मात्र से ही पापों से छुटकारा मिल जाता है।

श्री विश्वनाथ ज्योर्तिलिंग(वाराणसी)- 
सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्। 
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये।9।
क्या फल मिलता हैं- इस मंत्र के साथ विश्वेश्वर के दर्शन के बाद व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष प्राप्त होता है। कहते हैं कि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिङ्गï को स्पर्श यानि छूने भर से ही राजसूय यज्ञ का फल मिलता है। पंचामृत आदि से पूजा करने वाले व्यक्ति को अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो दर्शनार्थी उपवास करके ब्राह्मïणों को संतुष्टï करता है उसे सौत्रामणि यज्ञ का फल मिलता है। नारद पुराण के मुताबिक दर्शन के बाद ब्राह्मïण को दान देने से व्यक्ति की उन्नति होती है। शिव पुराण में उल्लेख है यह ज्योतिर्लिङ्गï मुक्ति और भुक्ति यानी शिव भक्तों को सभी तरह के सुख-समृद्धि मिलती है। उनके पावन नाम का जप करने वाले भक्त कर्म बंधन से छूटकर मोक्ष पद के अधिकारी हो जाते हैं।